हांडी


Product ID: 1007


Price : ₹400.00 /1 pieces

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आधुनिकता का हमारे जीवन पर इतना प्रभाव पड़ा है कि न केवल हमारे रहन-सहन के तरीके में बदलाव आया है बल्कि हमारे खान-पान का तरीका भी पूरी तरह से बदल गया है। इसके चलते किचन में भी इसी तरह कई बदलाव हुए है। जी हां पहले महिलाएं खाना बनाने के लिए चूल्हे और मिट्टी के बर्तन का प्रयोग किया करते थे, अब उनकी जगह गैस चूल्हों, फ्रिज और ओवन ने ले लिया है।

आज के समय में रोटी बनाने के लिए हर कोई लोहे या नॉन स्टिक तवे का इस्‍तेमाल करता है। आधुनिक लाइफस्‍टाइल के चलते मिट्टी के बर्तन का इस्तेमाल चलन से बाहर ही होता जा रहा है, लेकिन पुराने समय में इसका बेहद महत्व था और महिलाएं मिट्टी के बर्तन में ही बना खाना खाते थे। प्राचीन काल में मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाया जाता था। इसलिए लोग पहले बीमार भी कम पड़ते थे। लेकिन साइंस ने जैसे-जैसे तरक्की की वैसे-वैसे लोगों के किचन से मिट्टी के बर्तनों मानो गायब हो गए हैं। लेकिन क्‍या आप जानती हैं कि मिट्टी के बर्तनों में बना खाना हेल्‍थ के लिए बहुत अच्‍छा होता है। इन फायदों को देखते हुए बाजार में दोबारा से मिट्टी के बर्तनों का चलन आ गया है। महिलाएं खाना बनाने से लेकर खाना खाने तक और पानी के लिए भी मिट्टी के बर्तनों का इस्‍तेमाल करती हैं। आज हम आपको मिट्टी के बर्तनों में खाना खाने के फायदों के बारे में बता रहे हैं।

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mitti ke bartan inside

हेल्‍थ रहती है सही

अगर आपको पूरी लाइफ हेल्‍दी रहना हैं तो प्रेशर कुकर की बजाय मिट्टी के हांडी में खाना बनाकर खाना चाहिए। जी हां हमारी बॉडी को रोजाना 18 प्रकार के सूक्षम पोषक तत्वों की जरूरत होती है, जो मिट्टी के बर्तनों में बने खाने से आसानी से मिल जाती है। इन सूक्ष्म पोषक तत्वों में कैल्शियम, मैग्‍नीशियम, सल्‍फर, आयरन, सिलिकॉन, कोबाल्ट, जिप्सम आदि शामिल होते हैं। वहीं प्रेशर कुकर से बने भोजन में इन सारे पोषक-तत्वों नष्‍ट हो जाते है। इसलिए मिट्टी के ही बर्तन में खाना बनाना चाहिए।

कब्ज से मिलती है राहत

आज के समय में बहुत से लोगों को कब्ज की समस्या हो जाती है। आजकल के समय में दिनभर ऑफिस में बैठे रहने से गैस की समस्या हो जाती है, इसलिए आपको मिट्टी के तवे की रोटी खानी चाहिए। अगर आप मिट्टी के तवे की रोटी खाती हैं तो आपको कब्ज की समस्या में राहत मिलती है।

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माइक्रो न्यूट्रिएंट्स खत्‍म नहीं होते

मिट्टी के बर्तन में बनी दाल और सब्जी में 100 प्रतिशत माइक्रो न्यूट्रीएंट्स रहते हैं जबकि, प्रेशर कुकर में बनी दाल और सब्जी के 87 प्रतिशत पोषक तत्व एल्युमिनियम के पोषक-तत्वों द्वारा अवशोषित कर लिये जाते हैं। इसलिए अब डाइटिशियन और न्यूट्रिशियन भी मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने की सलाह देने लगे हैँ। साथ ही मिट्टी के तवे में रोटी बनाने से उसके पौष्टिक तत्व खत्म नहीं होते है। जबकि एल्यूमीनियम के तवे पर रोटी बनाने से उसमें से 87 प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।

 

स्‍वादिष्‍ट बनता है भोजन

मिट्टी के बर्तन में खाना टेस्‍टी भी बनता है। क्योंकि इसमें बने खाने में मिट्टी की सौंधी-सौंधी खुशबू आती है जो आपको एक अलग स्वाद का अनुभव देती है। जी हां आटा मिट्टी के तत्वों को अवशोषित कर लेता है और इसकी वजह से इसकी पौष्टिकता बढ़ जाती है। साथ ही इसमें प्रोटीन की भरपूर मात्रा में होता है जो आपके शरीर को बीमारियों से बचाता है। इसलिए कम से कम दाल और रोटी तो मिट्टी के बर्तन में जरूर बनाकर खाएं।

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सुंदरता में भी बेजोड़

ये मिट्टी के बर्तन सुन्दरता के मामले में भी बेहद आकर्षक लगते है, बस इन्हें थोडा संभाल के रखना पड़ता है। जैसे अगर आप चाय आम कप की बजाएं कुल्हड़ में पियेंगी तो ये देखने में जितना अच्छा लगता है उतना ही इसका टेस्‍ट भी बढ़ जाता है।



मिट्टी के बर्तन आपको अन्य धातुओं के बर्तनों से काफी सस्ते भी पड़ते है और हेल्‍थ के लिए ये बर्तन आपको बहुत फायदा भी पहुंचाते है। दूध दही से बने पकवानों के लिए मिट्टी के बर्तन सबसे बेहतर होते है। अगर आप खाना मिनरल्‍स, विटामिन्‍स और प्रोटीन प्राप्त करने के लिए खाती हैं तो आज से ही एल्युमिनियम के बर्तनों में खाना बनाना बंद करें और मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाना शुरू करें।

सुनील जी (9694780312) किसी भी प्रकार की कोइ समस्या हो तो क्रपा करके हमे बताये


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